वर्तमान समय में जब इंसान अपने जीवन में
तमाम परेशानियों का शिकार है और जीवन में सुख शांति पाना चाहता है,तो मित्रों तरक्की दो
बहुत कर ली परंतु आज भी हर चीज पर हमारे नियंत्रण में नहीं है हम मेहनत तो बहुत करते हैं
परंतु सबको एक जैसा फल नहीं मिलता है. कोई बीमार है ,कोई आर्थिक परेशानी का शिकार है, तो
किसी की शादी नहीं हो पा रही है, और किसी को नौकरी नहीं मिल पा रही है,तो कोई व्यापार में
घाटा हो रहा है, कोई पाप करता है और फिर मजे से जिंदगी काटता है और कोई बहुत सुख शुभ कर्म
करता है तब भी कष्ट उठा रहा है वैसे तो आजकल भाग्य और ज्योतिष को निरर्थक और अनपढ़ लोगों की
विद्या समझ कर नकार दिया जाता है लेकिन हम अभी कहीं कहीं गई बातों को लगातार शिकार होते हैं
हमें तब लगता है कि इस संसार में भाग नाम की भी एक चीज है जन्म कुंडली में 12 खाने होते हैं
जिन्हें हम ज्योतिष शब्द में12 भाव कहते हैं जन्मकुंडली अलग-अलग स्थानों पर अलग अलग तरह से
बनती है जैसे भारतीय पद्धति मे उत्तर भारत और दक्षिण भारत कुंडली बनाई जाती है जन्म कुंडली
बनाने के लिए 12 राशियों का उपयोग होता है जो मेष से मीन तक होती है 12 भाव में 12 अलग-अलग
राशियां आती है एक भाव में एक राशि ही होती है जन्म के समय भचक्र पर जो राशि उदय होती है वह
कुंडली का के पहले भाव में आता है अन्य राशियों घड़ी की विपरीत दिशा में चलती है माना पहले
भाव में मिथुन राशि आती है तो दूसरे भाव में कर्क इसी तरीके से बाकी राशियां चलेंगे अंतिम
बारहवें भाव में वृष राशि आएगी भाग्य पर बात करता है ज्योतिष मित्रों तुलसीदास जी ने कहा है
कर्म प्रधान विश्व रचि राखा मतलब कि यह संसार धर्म पर आधारित है अतः अच्छे कर्म करोगे तो
अच्छा फल और बुरे कर्म करोगे तो बुरा हमारा भाग्य भी हमारे कर्मों से मिलकर बना है पिछले
जन्म के संस्कार हमारे इस जन्म के भाग्य बनाते हैं तो आप समझे कि भाग्य क्या है|